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Thursday, April 16, 2026

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रतनपुर में तालाब बचाने की मुहिम तेज, जलसत्याग्रह कर दिया संरक्षण का संदेश..

तालाब सिर्फ जल स्रोत नहीं, हमारी सांस्कृतिक विरासत हैं.. डॉ. सोमनाथ यादव।

बिलासपुर। तालाबों के संरक्षण को लेकर रतनपुर में एक बार फिर जनजागरण की आवाज बुलंद हुई। ऐतिहासिक तालाबों की नगरी रतनपुर में आयोजित विचार गोष्ठी में पर्यावरण संरक्षण और जल प्रबंधन को लेकर गंभीर चर्चा हुई, जिसके बाद लोगों ने जलसत्याग्रह कर तालाबों को बचाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अरपा बचाओ अभियान के संयोजक डॉ. सोमनाथ यादव ने कहा कि तालाब केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि समाज के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन की धुरी हैं। प्राचीन समय में इन्हें साझा संपत्ति और पवित्र धरोहर माना जाता था। ये न केवल लोगों की प्यास बुझाते थे, बल्कि भूजल स्तर बनाए रखने और जैव विविधता को संरक्षित करने में भी अहम भूमिका निभाते थे।

उन्होंने रतनपुर की ऐतिहासिक विरासत का जिक्र करते हुए बताया कि यहां के तालाब प्राचीन काल में अत्यंत वैज्ञानिक और उन्नत तकनीक से बनाए गए थे। कल्चुरी राजवंश के शासकों ने जल प्रबंधन को अपना ‘राजधर्म’ मानते हुए शहर के चारों ओर तालाबों का ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जो आज भी आधुनिक इंजीनियरिंग के लिए प्रेरणादायक है। रतनपुर के कई तालाब ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व रखते हैं और कुछ का उल्लेख अंतरराष्ट्रीय स्तर तक होता है।

तालाबों की बिगड़ती हालत पर चिंता..

बाबू रेवाराम गुप्त सृजनपीठ, रतनपुर द्वारा आयोजित इस गोष्ठी में तालाबों की वर्तमान स्थिति पर भी चिंता जताई गई। संस्था के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि अधिकांश तालाबों पर अतिक्रमण हो चुका है। सौंदर्यीकरण के नाम पर हो रहे कांक्रीटीकरण से उनकी प्राकृतिक संरचना नष्ट हो रही है, जबकि मछलीपालन के लिए दिए जा रहे ठेकों ने भी तालाबों की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाया है।

संरक्षण के लिए ठोस कदमों की मांग..

गोष्ठी का संचालन करते हुए सचिव बृजेश श्रीवास्तव ने कहा कि तालाबों की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने तालाबों के किनारों पर वृक्षारोपण, नियमित सफाई, गंदे पानी के प्रवाह पर रोक और जलकुंभी हटाने जैसे कदम उठाने की मांग की। साथ ही बीकमा, आठबीसा, बेद, रत्नेश्वर और वैराग्यवन जैसे ऐतिहासिक तालाबों के संरक्षण के लिए विशेष योजना बनाने पर जोर दिया गया। तालाब किनारे स्थित मठ और मंदिरों के संरक्षण की भी आवश्यकता बताई गई।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर उठे सवाल..

गोष्ठी में उपस्थित वक्ताओं ने तालाबों की दुर्दशा के लिए प्रशासनिक लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह ऐतिहासिक धरोहर हमेशा के लिए समाप्त हो सकती है।

जलसत्याग्रह से दिया जागरूकता का संदेश..

कार्यक्रम के अंत में साहित्यकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने रतनपुर के प्रसिद्ध कृष्ण अर्जुनी तालाब पहुंचकर सांकेतिक जलसत्याग्रह किया। इस दौरान तालाब के किनारों की सफाई की गई और संरक्षण का संदेश दिया गया।इसके बाद सभी ने सूर्येश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना कर यह प्रार्थना की कि जनप्रतिनिधि और अधिकारी जागरूक हों और रतनपुर के सभी तालाब अपने पुराने वैभव में लौट सकें।

इस अवसर पर महेश श्रीवास, डॉ. सुधाकर बिबे, राजेंद्र मौर्य, रामेश्वर गुप्ता, अनूप श्रीवास, सतीश पांडेय, एम.डी. मानिकपुरी, दिनेश पांडेय, रामानंद यादव और मुकेश श्रीवास्तव सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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