करीब 100 सदस्यों की बैठक में कई प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित, 50 से अधिक पत्रकारों ने कलेक्टर और सहायक पंजीयक को सौंपा ज्ञापन।
सचिव-कोषाध्यक्ष का प्रभार बदलने को बताया असंवैधानिक, बैंक खाते, आय-व्यय और वित्तीय रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच की मांग।
बिलासपुर। बिलासपुर प्रेस क्लब में संविधान के कथित उल्लंघन और कार्यप्रणाली को लेकर बड़ा विवाद सामने आया हैं। स्वर्गीय डी.पी. चौबे प्रेस ट्रस्ट भवन, ईदगाह चौक में आयोजित प्रेस क्लब के सदस्यों की बैठक में करीब 100 पत्रकार शामिल हुए। बैठक में संस्था के संविधान का पालन नहीं होने, निर्वाचित पदाधिकारियों का प्रभार बदले जाने, वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल और क्लब के संचालन के तरीके को लेकर सदस्यों ने खुलकर नाराजगी जताई। लंबी चर्चा के बाद संविधान की सर्वोच्चता, लोकतांत्रिक व्यवस्था और संस्थागत पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से कई अहम प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।
बैठक में सबसे प्रमुख मुद्दा 31 जुलाई 2026 को प्रेस क्लब के चार पदाधिकारियों द्वारा सचिव संदीप करिहार और कोषाध्यक्ष किशोर कुमार सिंह का प्रभार बदले जाने की कार्रवाई रहा। उपस्थित सदस्यों ने इसे संविधान के विपरीत बताते हुए तत्काल निरस्त करने की मांग की। उनका कहना था कि किसी भी निर्वाचित पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई केवल संविधान में तय प्रक्रिया के तहत ही की जा सकती है। निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना लिया गया कोई भी फैसला संस्था की लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।

वरिष्ठ पत्रकार कमलेश शर्मा, अमिताभ तिवारी और भास्कर मिश्रा ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि कार्यकारिणी को वापस बुलाने या किसी निर्वाचित पदाधिकारी का प्रभार बदलने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लेने का अधिकार केवल सामान्य सभा को है। कार्यकारिणी अपने स्तर पर ऐसा निर्णय नहीं ले सकती।
इसी दौरान वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ तिवारी ने अध्यक्ष अजीत मिश्रा पर संविधान के विपरीत कार्य करने का आरोप लगाते हुए उनका प्रभार बदले जाने का प्रस्ताव रखा। बैठक में मौजूद सदस्यों ने ताली बजाकर और मेज थपथपाकर इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
बैठक में वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार कलवानी ने प्रेस क्लब के गैर-सदस्य सैयद जफर द्वारा क्लब परिसर में उनके साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा भी उठाया। इस पर सदस्यों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रेस क्लब की गरिमा बनाए रखने के लिए ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगनी चाहिए और भविष्य में गैर-सदस्यों की भूमिका भी स्पष्ट की जानी चाहिए।

सचिव संदीप करिहार और कोषाध्यक्ष किशोर कुमार सिंह ने बैठक में दावा किया कि उन्हें आज तक उनके पदों का विधिवत प्रभार नहीं सौंपा गया। उन्होंने कहा कि प्रेस क्लब की कार्यवाही पुस्तिका (मिनट्स बुक) अभी भी अध्यक्ष अजीत मिश्रा के पास है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस से मिलने वाली शुल्क राशि अध्यक्ष के पास रखी जा रही है, जबकि संविधान के अनुसार संस्था की आय-व्यय का लेखा-जोखा रखने और बैंक खाते का संचालन करने की जिम्मेदारी कोषाध्यक्ष की होती है। उनका यह भी आरोप था कि प्रेस कॉन्फ्रेंस से प्राप्त राशि नियमित रूप से अधिकृत बैंक खाते में जमा नहीं कराई जा रही है।
बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि 29 दिसंबर 2025 को वर्तमान कार्यकारिणी के गठन के बाद से अब तक प्रेस क्लब की एक भी सामान्य सभा आयोजित नहीं हुई। इसके कारण सदस्यों के सामने संस्था का वार्षिक आय-व्यय, लेखा-जोखा और अन्य जरूरी प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किए गए। उपस्थित सदस्यों ने इसे भी संविधान का गंभीर उल्लंघन बताया।
चर्चा के बाद बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा 31 जुलाई को लिए गए निर्णय के क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की जाए। इसी निर्णय के तहत सोमवार को सचिव संदीप करिहार और कोषाध्यक्ष किशोर कुमार सिंह के नेतृत्व में 50 से अधिक पत्रकारों ने कलेक्टर, बिलासपुर और फर्म एवं संस्थाएं, बिलासपुर संभाग के सहायक पंजीयक को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक, पंजीयक फर्म एवं संस्थाएं, छत्तीसगढ़ तथा सचिव, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग, छत्तीसगढ़ शासन को भी भेजने का निर्णय लिया गया।
ज्ञापन में मांग की गई है कि 29 दिसंबर 2025 से अब तक आयोजित सभी प्रेस कॉन्फ्रेंसों से प्राप्त शुल्क, प्रेस क्लब के बैंक खाते, बैंक स्टेटमेंट, कैश बुक, रसीद पुस्तिका, आय-व्यय रजिस्टर, वाउचर, कार्यवाही पुस्तिका और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि प्रेस कॉन्फ्रेंसों से प्राप्त कुल राशि में से कितनी रकम बैंक खाते में जमा हुई और शेष राशि किसके पास रही तथा उसका उपयोग किस वैधानिक अधिकार के तहत किया गया।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि जांच पूरी होने तक प्रेस क्लब की सभी आय केवल अधिकृत बैंक खाते में ही जमा कराई जाए, संस्था के सभी वित्तीय अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं और यदि जांच में संविधान के उल्लंघन, वित्तीय अनियमितता, संस्था की निधि के दुरुपयोग या किसी अन्य विधि-विरुद्ध कार्य की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ छत्तीसगढ़ सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 तथा अन्य लागू कानूनों के तहत कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाए।
कलेक्टर ने दिया निष्पक्ष जांच का भरोसा..
पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर संजय अग्रवाल से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और विस्तृत ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया। वहीं, फर्म एवं संस्थाएं, बिलासपुर संभाग के सहायक पंजीयक ने भी ज्ञापन प्राप्त कर आवश्यक कार्रवाई के लिए दो दिन का समय मांगा।

