ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा, CBI की अपील मंजूर..19 साल बाद आया बड़ा न्यायिक मोड़।
हत्या और साजिश के मामले में दोष सिद्ध, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दोबारा सुनवाई के बाद फैसला।
बिलासपुर। साल 2003 के चर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सीबीआई की अपील को स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के पुराने फैसले को पलट दिया है।
कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को हत्या (धारा 302) और आपराधिक साजिश (धारा 120-बी) का दोषी माना है। इसके तहत उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे नहीं भरने पर अतिरिक्त 6 महीने की सजा भुगतनी होगी।
दरअसल, साल 2007 में रायपुर की स्पेशल कोर्ट ने अमित जोगी को इस मामले में बरी कर दिया था, जबकि अन्य आरोपियों को सजा सुनाई गई थी। अब हाईकोर्ट ने इस फैसले को गलत मानते हुए कहा कि एक ही गवाही के आधार पर कुछ लोगों को दोषी और मुख्य आरोपी को बरी करना सही नहीं है।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर फिर से खोला गया था, जिसके बाद हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई हुई और अब यह अहम फैसला सामने आया है।
क्या है पूरा मामला….
दरअसल, 4 जून 2003 को राजधानी रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 आरोपित बनाए गए थे, जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। शेष आरोपितों में से 28 को सजा सुनाई गई थी, जबकि अमित जोगी को ट्रायल कोर्ट ने 31 मई 2007 को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।
इसके खिलाफ सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी, जहां से मामला बाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजा गया। इससे पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अन्य दोषियों की अपील खारिज करते हुए उनकी आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था।
हत्याकांड के बाद प्रारंभिक पुलिस जांच पर पक्षपात के आरोप लगे थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंप दी। CBI ने अपनी जांच में अमित जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे। हालांकि, पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में उन्हें पहले बरी कर दिया गया था, लेकिन बाद में मामला पुनः खोला गया।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सतीश जग्गी के अधिवक्ता बी.पी. शर्मा ने तर्क दिया कि यह हत्याकांड तत्कालीन सरकार प्रायोजित साजिश का हिस्सा था और जांच के दौरान सबूतों को प्रभावित किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में केवल प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं, बल्कि साजिश की कड़ियों का विश्लेषण भी महत्वपूर्ण होता है।
कौन है रामावतार जग्गी…
कारोबारी पृष्ठभूमि वाले रामावतार जग्गी, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर एनसीपी में शामिल हुए, तब जग्गी भी उनके साथ पार्टी में गए और उन्हें छत्तीसगढ़ में एनसीपी का कोषाध्यक्ष बनाया गया।
ये आरोपी पाए गए दोषी..
इस हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत और विश्वनाथ राजभर को दोषी पाया गया था।
उम्रकैद की सजा पाने वालों में दो तत्कालीन सीएसपी, एक थाना प्रभारी, रायपुर के मेयर एजाज ढेबर के भाई याहया ढेबर और शूटर चिमन सिंह भी शामिल हैं।

