बिलासपुर। भिक्षावृत्ति जैसी जटिल सामाजिक समस्या से निपटने के लिए अब सोच बदलने की जरूरत है। यह संदेश गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार से निकलकर सामने आया। समाजकार्य विभाग और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (एनआईएसडी), नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में 26-27 मार्च को आयोजित इस सेमिनार का समापन प्रभावी सुझावों और ठोस रणनीतियों के साथ हुआ।

समापन सत्र में प्रभारी कुलपति प्रो. अमित कुमार सक्सेना ने स्पष्ट कहा कि भिक्षावृत्ति को खत्म करने के लिए दान नहीं, बल्कि कौशल विकास, शिक्षा और रोजगार के अवसर देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज ‘भीख’ को सहानुभूति का माध्यम मानता रहेगा, तब तक यह समस्या जड़ से खत्म नहीं होगी।


कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संभागायुक्त बिलासपुर सुनील कुमार जैन ने भी इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भिक्षावृत्ति को धर्म और दान से जोड़ देना इसकी सबसे बड़ी वजहों में से एक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सीधे भीख देने के बजाय जरूरतमंदों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने में सहयोग करें। कोविड काल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उस समय लोगों ने भोजन और राशन उपलब्ध कराकर मदद का बेहतर मॉडल प्रस्तुत किया था।

पुनर्वास और समन्वय ही असली रास्ता..
इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग की अधिकारी रेणुका पिंगले ने कहा कि भिक्षावृत्ति में संलग्न बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए सामाजिक रक्षा एजेंसियों का समन्वय बेहद जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि योजनाओं का सही क्रियान्वयन ही इन बच्चों को सुरक्षित भविष्य दे सकता है।

वहीं एडिशनल एसपी मधुलिका सिंह ने जानकारी दी कि बिलासपुर पुलिस यूनिसेफ के सहयोग से ‘डायवर्जन प्रोग्राम’ चला रही है, जिसके तहत भिक्षावृत्ति या अपराध की ओर बढ़ रहे बच्चों को शिक्षा और पुनर्वास से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने युवाओं से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।


बाल तस्करी पर वार, तभी रुकेगी भिक्षावृत्ति..
एडिशनल एसपी रश्मीत कौर चावला ने भिक्षावृत्ति की जड़ बाल तस्करी को बताया। उन्होंने कहा कि यदि चाइल्ड ट्रैफिकिंग पर प्रभावी रोक लगाई जाए, तो भिक्षावृत्ति अपने आप कम हो जाएगी। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि संदिग्ध परिस्थितियों में बच्चों को नजरअंदाज न करें और तुरंत पुलिस को सूचना दें।


ट्रैफिक, सुरक्षा और अपराध से जुड़ा मुद्दा..
इस खास मौके पर एडिशनल एसपी, ट्रैफिक राम गोपाल करिहारे ने बताया कि सड़कों पर भिक्षावृत्ति करने वाले बच्चों की वजह से यातायात प्रभावित होता है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है। पुलिस ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें पुनर्वास योजनाओं से जोड़ने का प्रयास कर रही है, ताकि वे अपराध की ओर न बढ़ें।


विशेषज्ञों ने दिया प्रशिक्षण, छात्रों ने लिया संकल्प..
सेमिनार में प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों से आए विशेषज्ञों ने छात्रों को भिक्षावृत्ति उन्मूलन के व्यावहारिक उपायों पर प्रशिक्षण दिया। इस दौरान रीमा छत्रवानी (चाइल्ड लाइन, समन्वयक बिलासपुर), डॉ. दीनानाथ यादव (विभागाध्यक्ष, समाज कार्य विभाग, मैथ्स यूनिवर्सिटी रायपुर) ममता तिवारी (अधीक्षक, चिल्ड्रेन होम बिलासपुर) ने बच्चों के पुनर्वास, संरक्षण और सामाजिक हस्तक्षेप के विभिन्न मॉडल साझा किए। इस अवसर पर डॉ.सुनील यादव, (असिस्टेंट प्रोफेसर, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय) रिसर्च स्कॉलर प्राजंलि साहू, राखी यादव,श्री अविनाश एवं विश्वविद्यालय की अन्य विभागों के पीएचडी शोधार्थी, एवं बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।



इस दौरान समापन कार्यक्रम की रूपरेखा विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना यादव ने प्रस्तुत की, संचालन डॉ. मोहिनी गौतम ने किया और अंत में सरवत नकवी ने प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए।

