बिलासपुर। जशपुर जिले की बगिया दाबित उद्वहन सिंचाई योजना को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए किसानों और अधिकारियों का एक अध्ययन दल मध्यप्रदेश रवाना हुआ है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 15 जनवरी 2026 की रात बगिया गांव से बस को हरी झंडी दिखाकर इस दल को रवाना किया। इसके बाद 16 जनवरी को दल बिलासपुर से ट्रेन के जरिए भोपाल पहुंचा।

यह सिंचाई योजना मैनी नदी पर प्रस्तावित है और भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे Modernisation of Command Area Development (MCAD) कार्यक्रम के तहत स्वीकृत की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर शुरू हुए इस कार्यक्रम के अंतर्गत बगिया क्लस्टर को 95.89 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है।

जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता, स्टेट नोडल ऑफिसर आलोक अग्रवाल ने बताया कि इस योजना से बगिया सहित आसपास के 13 गांवों के लगभग 9866 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में खरीफ और रबी दोनों मौसमों में सिंचाई की सुविधा मिलेगी। परियोजना का निर्माण कार्य 30 सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके बाद पांच साल तक इसका संचालन और रखरखाव किया जाएगा।
इस योजना में आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिसमें दाबित पाइप लाइन से सिंचाई, सौर ऊर्जा आधारित बिजली व्यवस्था, कंप्यूटर और सेंसर के जरिए जल प्रबंधन, तथा जीआईएस मैपिंग शामिल है। इससे पानी की बचत होगी और किसानों को कम पानी में अधिक फसल उत्पादन का लाभ मिलेगा।

योजना को सफल बनाने के उद्देश्य से यह अध्ययन दल 16 से 19 जनवरी तक मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की मोहनपुरा और कुंडालिया सिंचाई परियोजनाओं का अध्ययन करेगा। दल में जल संसाधन, कृषि और उद्यानिकी विभाग के 32 अधिकारी-कर्मचारी और योजना से लाभान्वित 13 गांवों के 26 किसान शामिल हैं।
यह अध्ययन छत्तीसगढ़ में आधुनिक और प्रभावी सिंचाई व्यवस्था लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

