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Sunday, February 8, 2026

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ब्रेकिंग…छत्तीसगढ़,आंध्र बॉर्डर पर बड़ा ऑपरेशन, कुख्यात नक्सली कमांडर मदवी हिड़मा ढेर..

सुरक्षाबलों की बड़ी सफलता, एक करोड़ से ज्यादा इनामी हिड़मा और उसकी पत्नी राजे मुठभेड़ में मारे गए।

दंतेवाड़ा, झीरम और बीजापुर जैसे बड़े हमलों का मास्टरमाइंड था हिड़मा।

छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ में चल रहे नक्सल उन्मूलन अभियान के बीच सुरक्षा बलों को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। जानकारी के मुताबिक, सुरक्षाबलों ने माओवादियों के टॉप कमांडर मदवी हिड़मा को एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया है। यह मुठभेड़ छत्तीसगढ़- आंध्र प्रदेश बॉर्डर के घने जंगलों में हुई, जहाँ काफी समय से हिड़मा की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिल रही थी।

बताया जा रहा है कि ऑपरेशन के दौरान हिड़मा की दूसरी पत्नी राजे (राजक्का) भी मुठभेड़ में मारी गई। हालांकि इस ऑपरेशन में कौन-कौन सी सुरक्षा एजेंसियां शामिल थीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

कौन था मदवी हिड़मा..?

मदवी हिड़मा देश के सबसे कुख्यात और खतरनाक नक्सल कमांडरों में गिना जाता था।

उसकी पहचान और पृष्ठभूमि..

जन्म: 1981, पूवर्ति गांव, सुकमा

पद: पीएलजीए बटालियन नं. 1 का प्रमुख – माओवादियों की सबसे खतरनाक लड़ाकू इकाई

इनाम: कुल 1 करोड़ रुपये से ज्यादा

असली नाम: संतोष

विशेष पहचान: CPI (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सबसे युवा और बस्तर क्षेत्र से शामिल होने वाला एकमात्र आदिवासी सदस्य।

हिड़मा संगठन की सैन्य रणनीतियों और घात लगाकर हमले करने के लिए जाना जाता था। वह करीब 26 बड़े हमलों का प्रमुख मास्टरमाइंड रहा।

हिड़मा किन बड़े नक्सली हमलों में शामिल था..?

2010 दंतेवाड़ा हमला: 76 सीआरपीएफ जवान शहीद।

2013 झीरम घाटी नरसंहार: 27 लोगों की मौत, शीर्ष कांग्रेसी नेता भी शामिल।

2021 सुकमा-बीजापुर मुठभेड़: 22 सुरक्षा जवान शहीद।

इन घटनाओं के कारण वह देश की सबसे वांछित नक्सली सूची में सबसे ऊपर था।

कुछ दिन पहले मां से मिलने पहुंचे थे गृहमंत्री…

कुछ समय पहले ही प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा पूवर्ति गांव पहुंचे थे। वहां उन्होंने हिड़मा की मां से मुलाकात की थी। मां ने बताया था कि वह कई बार बेटे को हथियार छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने की अपील कर चुकी है, लेकिन वह हर बार उनकी बात को नज़रअंदाज़ कर देता था।

संगठन में हाल ही में हुआ था बड़ा फेरबदल…

टॉप माओवादी नेता बसवराजू की मौत के बाद संगठन में पुनर्गठन हुआ था। इसी पुनर्गठन में हिड़मा को केंद्रीय समिति की सदस्यता दी गई थी और उसे रणनीतिक ऑपरेशनों की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह ऑपरेशन अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। हिड़मा के मारे जाने से बस्तर क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।

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