रायपुर। रायपुर में 15 जनवरी को आयोजित पत्रकार वार्ता में छत्तीसगढ़ शासन के खनिज संसाधन विभाग के सचिव पी. दयानंद ने राज्य के खनिज क्षेत्र में हुए विकास और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ खनिज संपदा से भरपूर राज्य है, जहां 28 से ज्यादा तरह के खनिज पाए जाते हैं। सरकार इन खनिजों के अन्वेषण, खनन और नीलामी को पारदर्शी तरीके से कर रही है, जिससे बीते दो साल में खनिज राजस्व में काफी बढ़ोतरी हुई है।
सचिव ने कहा कि स्थानीय उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराने और राज्य की आय बढ़ाने में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (सीएमडीसी) की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। सीएमडीसी अभी टिन, बॉक्साइट, लौह अयस्क, तांबा, हीरा, मैंगनीज, डोलोमाइट और कोयला सहित 9 खनिजों के अन्वेषण और खनन का काम कर रही है।
उन्होंने बस्तर क्षेत्र के आदिवासी समुदाय के लिए किए गए खास प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि टिन अयस्क का क्रय मूल्य बढ़ाकर 1926 रुपये प्रति किलो कर दिया गया है। इससे आदिवासी परिवारों की आय लगभग तीन गुना बढ़ी है। टिन की ऑनलाइन खरीदी और तुरंत भुगतान की व्यवस्था शुरू की जा रही है, जिसके लिए ‘TIN- ट्राइबल इंसेंटिव फॉर नेचुरल रिसोर्सेज’ नाम से नया पोर्टल तैयार किया जा रहा है।
क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सीएमडीसी, मायल और कोल इंडिया लिमिटेड के साथ मिलकर मैंगनीज, ग्रेफाइट और अन्य खनिजों के अन्वेषण में अच्छे परिणाम मिले हैं। इसके साथ ही खनिज प्रसंस्करण, तकनीकी सहयोग और युवाओं के कौशल विकास पर भी काम किया जा रहा है।
सचिव ने बताया कि MSTC के जरिए की गई पारदर्शी नीलामी से लौह अयस्क की रिकॉर्ड बिक्री हुई है। आरीडोंगरी खदान से राज्य को करोड़ों रुपये का राजस्व मिला है और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी मिला है। आने वाले समय में लौह अयस्क का उत्पादन 5 लाख टन से बढ़ाकर 20 लाख टन प्रति वर्ष करने की योजना है।
पी. दयानंद ने कहा कि हीरा, तांबा, कोयला और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़ी नई परियोजनाएं छत्तीसगढ़ के विकास, रोजगार सृजन और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को मजबूती देंगी।

