मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में 119 करोड़ रुपये की परियोजना पर तेज़ी से काम, लगभग 4,000 किसान परिवार होंगे लाभान्वित।
‘समृद्धि की पाठशाला’ में किसानों को आधुनिक सिंचाई, जल प्रबंधन और नई कृषि तकनीकों की दी गई जानकारी।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड के बगिया क्लस्टर में किसानों के लिए संचालित समृद्धि-कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन आधुनिकीकरण (एम-कैड) योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। इस योजना का उद्देश्य हर खेत तक पर्याप्त पानी पहुंचाना और पानी की हर बूंद का सही उपयोग सुनिश्चित करना है।
इसी उद्देश्य से कांसाबेल विकासखंड के ग्राम दोकड़ा में भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय, छत्तीसगढ़ शासन और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में किसानों के लिए “समृद्धि की पाठशाला” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों को आधुनिक सिंचाई व्यवस्था, जल संरक्षण, जल प्रबंधन और कृषि से जुड़ी नई तकनीकों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में जशपुर जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी कौशल्या साय, कलेक्टर रोहित व्यास, भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के उप संचालक शुभम पचौरी, घनश्याम पटेल, टीम लीडर एवं एरिगेशन एक्सपर्ट वैभव दाउरे, एनीटो फ्रांसिन शोभित, एफएओ के राजेश कुमार, जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता जे.के. नेताम, मुख्य अभियंता अनिल खलको, एम-कैड के स्टेट नोडल ऑफिसर आलोक अग्रवाल, परियोजना निदेशक संजय पाठक, कार्यपालन अभियंता अखिलेश साहू एवं विनोद भगत, एसडीओ कुर्रे, सतीश मिश्रा, रूपेश कश्यप, सलाहकार सतीश सराफ एवं विजय खरे, जल उपयोगकर्ता समिति की सचिव श्रीमती नेहा गुप्ता एवं समिति के सदस्य, विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, 13 ग्राम पंचायतों के सरपंच, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय ने कहा कि यह परियोजना किसानों के लिए बेहद लाभदायक साबित होगी। बेहतर सिंचाई सुविधा मिलने से किसान खरीफ के साथ-साथ रबी और अन्य फसलें भी आसानी से ले सकेंगे, जिससे उनकी आय बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच के कारण बगिया क्षेत्र में यह महत्वाकांक्षी योजना शुरू हो सकी है।
मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी कौशल्या साय ने भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की शुभकामनाएं देते हुए किसानों और महिलाओं से इस योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना जशपुर के किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने जल संरक्षण और पानी के सही उपयोग पर जोर देते हुए बगिया को देश के लिए जल प्रबंधन का आदर्श मॉडल बनाने का आह्वान किया।
कलेक्टर रोहित व्यास ने बताया कि “समृद्धि की पाठशाला” का उद्देश्य किसानों को आधुनिक सिंचाई और जल प्रबंधन की जानकारी देना है। उन्होंने कहा कि परियोजना को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए जशपुर के किसानों को मध्यप्रदेश की मोहनपुरा-कुंडलिया सिंचाई परियोजना का अध्ययन भ्रमण भी कराया गया। इस योजना में जमीन के नीचे पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जिससे भूमि अधिग्रहण की जरूरत नहीं पड़ेगी और किसानों की जमीन सुरक्षित रहेगी।

भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के उप संचालक शुभम पचौरी ने बताया कि एम-कैड योजना देश के 38 क्लस्टरों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की जा रही है, जिनमें बगिया क्लस्टर भी शामिल है। योजना के तहत भूमिगत पाइपलाइन से खेतों तक पानी पहुंचाया जाएगा, जल उपयोगकर्ता समितियां इसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी निभाएंगी तथा किसानों की जरूरत के अनुसार वैज्ञानिक तरीके से पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे किसान वर्षा पर कम निर्भर रहेंगे, दो से तीन फसलें ले सकेंगे, कृषि उत्पादन में 15 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होगी, सिंचाई लागत घटेगी और उद्यानिकी व नकदी फसलों को बढ़ावा मिलेगा।
जल उपयोगकर्ता समिति की सचिव श्रीमती नेहा गुप्ता ने मध्यप्रदेश की मोहनपुरा-कुंडलिया परियोजना के अध्ययन भ्रमण का अनुभव साझा किया। उन्होंने किसानों और विशेष रूप से महिलाओं से जल प्रबंधन और खेती में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि महिलाओं की सहभागिता से जल संसाधनों का बेहतर उपयोग, खेती की उत्पादकता और गांव का समग्र विकास संभव है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल उपयोगकर्ता समिति सभी किसानों के सहयोग से सिंचाई व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाएगी तथा योजना का लाभ हर किसान तक पहुंचाने का प्रयास करेगी।

एफएओ के राजेश कुमार ने कहा कि योजना की सफलता किसानों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करेगी। उन्होंने बताया कि अगले पांच वर्षों तक किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और हर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
13 गांवों के 4,933 हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगा लाभ..
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 1 मई को अपने गृह ग्राम बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में लगभग 119 करोड़ रुपये की इस परियोजना का शुभारंभ किया था। इसमें भारत सरकार ने 95.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।
इस योजना के तहत बगिया, उसकुटी, रजोती, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, दोकड़ा, सिकरिया, पतराटोली, गहिराडोहर, बीहाबल, नरियरडांड और ढुढुडांड सहित 13 गांवों के 4,933 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ और 4,933 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसल, यानी कुल 9,866 हेक्टेयर क्षेत्र को आधुनिक दाबित सिंचाई प्रणाली के माध्यम से सिंचाई सुविधा मिलेगी। इससे लगभग 4,000 किसान परिवार लाभान्वित होंगे।

आधुनिक तकनीक से होगा जल प्रबंधन..
एम-कैड के स्टेट नोडल ऑफिसर आलोक अग्रवाल ने बताया कि बगिया क्लस्टर परियोजना में सौर ऊर्जा आधारित बिजली व्यवस्था, लगभग 500 किलोमीटर लंबा प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क, SCADA और IoT जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इससे किसानों को जरूरत के अनुसार समय पर सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा।

उन्होंने बताया कि शुरुआती पांच वर्षों तक परियोजना का संचालन और रखरखाव निर्माण एजेंसी करेगी, इसके बाद इसकी जिम्मेदारी जल उपयोगकर्ता समिति को सौंप दी जाएगी। उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य पानी की हर बूंद का सही उपयोग, कृषि उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाना तथा जशपुर को आधुनिक दाबित सिंचाई प्रणाली का राष्ट्रीय मॉडल बनाना है। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने एम-कैड मॉडल को अपनाया है, जिसे केंद्र सरकार ने अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय मॉडल माना है।
किसानों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार..
कार्यक्रम के खुले सत्र में किसानों ने सिंचाई और जल प्रबंधन से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने समाधान किया। किसानों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बगिया क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था में पहले से काफी सुधार हुआ है और नई योजना से खेती को नई दिशा और गति मिलेगी।
कार्यक्रम का समापन “अब पानी खेत ढूंढेगा, किसान नहीं” और “हर बूंद का सही उपयोग, हर खेत तक सही पानी” के संदेश के साथ किसानों की उत्साहपूर्ण सहभागिता के बीच हुआ।

