बारूद के साये में शांति की तलाश, संजय अलंग का नया कविता संग्रह ‘युद्ध के पार’ प्रकाशित..

युद्ध और अशांति के पार मानवीय मूल्यों की तलाश करती कविताएँ, 136 पृष्ठों के संकलन को गगन गिल की सराहना.. साहित्य प्रेमियों के लिए ऑनलाइन उपलब्ध।

नई दिल्ली। दुनिया जब युद्ध, हिंसा, संघर्ष और अशांति के दौर से गुजर रही है, ऐसे समय में शांति, मानवीय संवेदना और जीवन मूल्यों की बात करती कविताएँ एक नई उम्मीद जगाती हैं। इसी भावभूमि को शब्दों में पिरोता प्रसिद्ध साहित्यकार संजय अलंग का नया कविता संग्रह ‘युद्ध के पार’ प्रकाशित हुआ है। राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित यह संग्रह अपने उपशीर्षक ‘शांति की कविताएँ’ के माध्यम से युद्ध की विभीषिका से परे शांति और मानवीय चेतना की ओर ध्यान आकर्षित करता है।

136 पृष्ठों के इस कविता संग्रह की सबसे खास बात इसका विषय और उसकी संवेदनात्मक अभिव्यक्ति है। युद्ध और अशांति के बीच शांति की आवश्यकता, मानवीय मूल्यों की अहमियत और जीवन से जुड़े व्यापक सवाल इस संग्रह की मूल भावभूमि को सामने लाते हैं। यह पुस्तक पाठकों को उस दुनिया के बारे में सोचने का अवसर देती है, जहां संघर्ष और हिंसा के बजाय शांति, संवेदना और मानवीयता को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

संग्रह को लेकर प्रसिद्ध कवयित्री एवं साहित्यकार गगन गिल ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है, “बहुत अलग तरह की कविताएँ हैं, wise and wisening.” उनकी यह टिप्पणी संकलन की विशिष्ट काव्यात्मक पहचान और विचारोत्तेजक अभिव्यक्ति को रेखांकित करती है।

साहित्यकार संजय अलंग का यह नया कविता संग्रह ऐसे समय में सामने आया है, जब युद्ध और हिंसा की घटनाएँ पूरी दुनिया को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे माहौल में शांति की बात करती ये कविताएँ साहित्य के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं और जीवन मूल्यों को केंद्र में लाती हैं।

साहित्य प्रेमी और कविता के पाठक इस संग्रह को राजकमल प्रकाशन की आधिकारिक वेबसाइट से ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं। फिलहाल पुस्तक पर 20 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।

                      पुस्तक विवरण..

– पुस्तक : युद्ध के पार (शांति की कविताएँ)
– लेखक : संजय अलंग
– प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली
– पृष्ठ संख्या : 136
– विशेष छूट : 20 प्रतिशत

ऑनलाइन ऑर्डर लिंक:
https://www.rajkamalprakashan.com/products/yuddh-ke-paar?

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