छत्तीसगढ़ समेत 5 राज्यों के जनजातीय कलाकार होंगे शामिल, परिधान, चित्रकला और हस्तशिल्प का होगा प्रदर्शन।
‘आदि-परिधान’, ‘आदि रंग’ और ‘आदि-हाट’ के माध्यम से दिखेगी जनजातीय जीवन शैली, कला और पारंपरिक स्वाद।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से नवा रायपुर में 13 और 14 मार्च 2026 को ‘परम्परा से पहचान तक आदि परब-2026’ का भव्य आयोजन किया जाएगा। दो दिवसीय यह कार्यक्रम नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (TRTI) परिसर में आयोजित होगा।
यह आयोजन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की परिकल्पना और निर्देश पर किया जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से आदिम जाति विकास विभाग के अंतर्गत आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा किया जाएगा।
इस संबंध में आयोजित प्रेसवार्ता में आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा और संस्थान की संचालक हिना अनिमेष नेताम ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना, उनकी पारंपरिक विरासत को संरक्षित करना और उनकी कला व परंपराओं को व्यापक मंच प्रदान करना है।
उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की 43 चिन्हांकित जनजातियों और उपजनजातियों की संस्कृति, परंपरा और जीवन शैली को प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड से भी जनजातीय कलाकार और समुदाय इस आयोजन में भाग लेंगे।
पहली बार एक मंच पर दिखेंगी 43 जनजातियों की पारंपरिक वेशभूषा…
आदि परब-2026 के तहत “आदि-परिधान जनजातीय अटायर शो” का आयोजन किया जाएगा। यह शो 13 मार्च को सुबह 10:30 बजे से रात 8 बजे तक तथा 14 मार्च को शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक आयोजित होगा।
इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की 43 जनजातियों की पारंपरिक वेशभूषा और उनकी सांस्कृतिक विशेषताओं को पहली बार एक ही मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। प्राकृतिक रंगों, स्थानीय संसाधनों और हस्तनिर्मित कपड़ों से तैयार ये परिधान जनजातीय जीवन शैली और प्रकृति के साथ उनके गहरे संबंध को दर्शाएंगे।
इस अटायर शो में भाग लेने के लिए 120 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन पंजीयन कराया है, जो अलग-अलग जनजातीय समुदायों की पारंपरिक वेशभूषा को मंच पर प्रस्तुत करेंगे।
‘आदि रंग’ में चित्रकला के जरिए दिखेगा जल-जंगल-जमीन का संदेश…
आदि परब के दौरान “आदि रंग – जनजातीय चित्रकला महोत्सव” का भी आयोजन किया जाएगा। इस महोत्सव में जनजातीय कलाकार अपनी पारंपरिक चित्रकला के माध्यम से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण, जनजातीय जीवन दर्शन और पर्यावरणीय चुनौतियों को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे।
चित्रकला प्रतियोगिता में 155 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन पंजीयन कराया है। प्रतियोगिता दो आयु वर्गों 18 से 30 वर्ष और 30 वर्ष से अधिक में आयोजित की जाएगी।
दोनों श्रेणियों में प्रथम पुरस्कार 20 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 15 हजार रुपये और तृतीय पुरस्कार 10 हजार रुपये दिया जाएगा। इसके अलावा दोनों आयु वर्गों के 10-10 प्रतिभागियों को 2000 रुपये का सांत्वना पुरस्कार भी प्रदान किया जाएगा।
‘आदि-हाट’ में मिलेगा जनजातीय हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद..
कार्यक्रम के दौरान “आदि-हाट जनजातीय शिल्प मेला” भी लगाया जाएगा। इस हाट में छत्तीसगढ़ के जनजातीय हस्तशिल्प, वनोपज और पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया जाएगा।
यहां 14 स्वसहायता समूहों द्वारा स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां आगंतुकों को जनजातीय हस्तशिल्प उत्पादों के साथ-साथ पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी मिलेगा। यह हाट जनजातीय कलाकारों और समूहों के लिए अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और उन्हें बाजार उपलब्ध कराने का अवसर भी प्रदान करेगा।
यूपीएससी में चयनित जनजातीय युवाओं का होगा सम्मान…
आदि परब-2026 के दौरान संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) 2025 में चयनित जनजातीय वर्ग के अभ्यर्थियों डायमंड सिंह ध्रुव और अंकित साकनी का सम्मान भी किया जाएगा।
इसके अलावा इस अवसर पर ‘प्रयास’ संस्थान के विद्यार्थियों को आदिम जाति विकास विभाग की योजनाओं के तहत लैपटॉप वितरण भी किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता मिल सके।

