बिलासपुर। संसद की जिम्मेदारियों और दिल्ली के व्यस्त कार्यक्रमों के बीच सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज बिलासपुर पहुंचे। उन्होंने डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, कोटा में आयोजित विशेष कार्यक्रम में शामिल होकर विश्वविद्यालय परिवार और उपस्थित लोगों से मुलाकात की। कार्यक्रम से पहले भी वे संबंधित लोगों से फोन पर लगातार संपर्क में रहे और आयोजन को लेकर जरूरी समन्वय करते रहे।
विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम संत गहिरा गुरु के जीवन, व्यक्तित्व, सामाजिक योगदान और विचारों पर केंद्रित रहा। इस दौरान संत गहिरा गुरु के जीवन और समाज के लिए किए गए कार्यों पर हो रहे अकादमिक एवं शोध कार्यों की जानकारी सांसद को दी गई। विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार सहित अन्य सदस्य इस अवसर पर मौजूद रहे।
सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि संत गहिरा गुरु के विचार और सामाजिक योगदान आज भी प्रासंगिक हैं। उनकी विरासत और विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उनके जीवन पर शोध और अकादमिक अध्ययन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर पर इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान सांसद का सहज अंदाज भी देखने को मिला। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार और मौजूद लोगों से आत्मीयता के साथ बातचीत की। दिल्ली में संसदीय दायित्वों में व्यस्त रहने के बावजूद स्थानीय कार्यक्रम में उनकी सक्रिय भागीदारी ने क्षेत्र और लोगों से उनके जुड़ाव को भी सामने रखा।

इसके बाद हरेली पर्व के अवसर पर पारंपरिक पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। इसमें बिलासपुर सांसद प्रतिनिधि, डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय के कुलपति व रजिस्ट्रार, छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सांसद ने हरेली पूजा में शामिल होकर छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति और लोकपरंपरा से जुड़े इस पर्व की खुशियों में सहभागिता की।

सांसद चिंतामणि महाराज का यह दौरा संसदीय जिम्मेदारियों के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी को भी दर्शाता है। दिल्ली की व्यस्तता के बावजूद स्थानीय कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी और लोगों से सहज संवाद ने उनके जनप्रतिनिधि के रूप में जमीन से जुड़े रहने की तस्वीर सामने रखी।

