बिलासपुर। अगर आप रेलवे स्टेशन की नई और चमचमाती तस्वीर देखकर यह मान रहे हैं कि यात्रियों की हर सुविधा भी बेहतर हो चुकी है, तो CAG की रिपोर्ट आपको चौंका सकती है। दरसअल, रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, रायगढ़ और चांपा समेत कई रेलवे स्टेशनों का अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत कायाकल्प किया जा रहा है। स्टेशन के नए भवन और आधुनिक सुविधाओं की तस्वीरें लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन इसी बीच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की रिपोर्ट ने यात्री सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे यानी SECR का डेफिशिएंसी स्कोर 106.6 रहा, जो देश के 17 रेलवे जोन में सबसे ज्यादा है। यानी यात्री सुविधाओं से जुड़ी कमियों के मामले में SECR का प्रदर्शन सबसे खराब दर्ज किया गया।
512 स्टेशनों का ऑडिट, 458 में मिली कमी..
CAG ने देश के 512 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों का ऑडिट किया। इनमें 458 स्टेशन यानी करीब 89 फीसदी ऐसे मिले, जहां न्यूनतम यात्री सुविधाओं में कमी पाई गई।
इन कमियों में पीने का पानी, शौचालय, बैठने की व्यवस्था, प्लेटफॉर्म शेड, पंखे और वाटर कूलर जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं।
SECR के जिन स्टेशनों को ऑडिट में शामिल किया गया, उनमें रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, रायगढ़, चांपा, भाटापारा और भिलाई पावर हाउस शामिल हैं।
बजट मिला, लेकिन 42 फीसदी खर्च नहीं हो पाया..
CAG की रिपोर्ट का एक अहम पहलू यात्री सुविधाओं के बजट से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार 2019-20 से 2023-24 के बीच यात्री सुविधाओं के लिए मिले बजट का करीब 42 फीसदी हिस्सा खर्च ही नहीं हो पाया।
यानी सवाल सिर्फ पैसे की उपलब्धता का नहीं, बल्कि उस पैसे को समय पर और सही तरीके से खर्च कर यात्री सुविधाओं में बदलने का भी है।
395 कामों की समीक्षा, 59 फीसदी में देरी..
CAG ने यात्री सुविधाओं से जुड़े 395 कार्यों की समीक्षा की। इनमें से 59 फीसदी काम तय समय से पीछे मिले। कई परियोजनाओं में एक से चार साल तक की देरी दर्ज की गई।
सिर्फ 41 फीसदी काम समय पर पूरे हुए..
रिपोर्ट में कामों में देरी के पीछे खराब प्लानिंग, कुशल लेबर की कमी और ठेकेदारों की नाकामी जैसी वजहों का उल्लेख किया गया है।
यात्री जिस पानी को पी रहा है, उसकी जांच पर भी सवाल..
CAG रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों पर मिलने वाले पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर आंकड़े सामने आए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार 2023-24 में 139 स्टेशनों पर क्लोरीन की मात्रा तय सीमा से बाहर मिली। इनमें 63 स्टेशनों पर 50 फीसदी से ज्यादा सैंपल निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे।
इसी अवधि में 56 स्टेशनों के नलों के पानी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाया गया।
यानी रेलवे स्टेशन पर यात्री के लिए सबसे बुनियादी जरूरतों में शामिल पीने के पानी की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है।
एक तरफ करोड़ों का विकास, दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाओं की कमी..
SECR को अलग-अलग वर्षों में रेलवे के बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों के लिए बड़ा बजट मिला है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2021-22 में ₹5,050 करोड़, 2022-23 में ₹8,063 करोड़, 2023-24 में ₹6,007 करोड़, 2024-25 में ₹6,922 करोड़, 2025-26 में ₹6,925 करोड़ और 2026-27 में ₹7,470 करोड़ का बजट बताया गया है।
इनमें ट्रैक नवीनीकरण, सिग्नलिंग, मल्टी-ट्रैकिंग, विद्युतीकरण, नई रेल लाइन, सुरक्षा कार्य, अमृत भारत स्टेशन योजना और अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाएं शामिल हैं।
रेलवे का तर्क – तस्वीर अभी पूरी नहीं हुई..
हालांकि रेलवे का कहना है कि स्टेशन विकास का काम सिर्फ सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत नए भवन के साथ बेहतर प्लेटफॉर्म, लिफ्ट, एस्केलेटर, वेटिंग एरिया और अन्य यात्री सुविधाओं पर काम किया जा रहा है। रेलवे के मुताबिक कई परियोजनाएं अभी निर्माणाधीन हैं। इनके पूरा होने के बाद यात्रियों को पहले से बेहतर और आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।
बाइट: शेख शमी उर रहमान, CPRO, SECR
ZRUCC ने भी उठाई बुनियादी सुविधाओं की निगरानी की जरूरत..
जोनल रेलवे यूजर्स कंसल्टेटिव कमेटी यानी ZRUCC से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि स्टेशन के विकास का मूल्यांकन केवल नए भवन और खूबसूरत परिसर से नहीं किया जाना चाहिए।
यात्रियों को साफ पानी, पर्याप्त शौचालय, बैठने की जगह, प्लेटफॉर्म शेड, पंखे और सफाई जैसी सुविधाएं नियमित रूप से मिल रही हैं या नहीं, इसकी लगातार निगरानी जरूरी है। यात्रियों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई और निरीक्षण व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत भी बताई गई है।
बाइट: तोखन साहू,(केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य, राज्य मंत्री)
अब सवाल स्टेशन की खूबसूरती नहीं, यात्री की सुविधा का है..
अमृत भारत स्टेशन योजना से छत्तीसगढ़ के रेलवे स्टेशनों की तस्वीर निश्चित रूप से बदल रही है। नए भवन बन रहे हैं, स्टेशन आधुनिक हो रहे हैं और करोड़ों रुपये की परियोजनाएं चल रही हैं।
लेकिन CAG की रिपोर्ट एक बेहद अहम सवाल सामने रखती है..अगर स्टेशन की इमारत चमक रही है, लेकिन यात्री को साफ पानी, पर्याप्त शौचालय, बैठने की जगह, शेड और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है, तो इस विकास का असली फायदा यात्री तक कितना पहुंच रहा है?
क्योंकि रेलवे स्टेशन की असली पहचान सिर्फ उसकी चमकती इमारत से नहीं, बल्कि वहां पहुंचने वाले हर यात्री को मिलने वाली साफ, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा से होती है।

