13 साल चली जांच और 100 से ज्यादा गवाहों की गवाही के बाद आया फैसला.. साय बोले न्यायिक प्रक्रिया तथ्यों और साक्ष्यों से चलती है, आरोपों से नहीं।
रायपुर/बिलासपुर। झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में NIA की विशेष अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच उस समय NIA को सौंपी गई थी, जब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार थी। करीब 13 वर्षों तक जांच और न्यायिक प्रक्रिया चली। इस दौरान 100 से अधिक गवाहों की गवाही हुई और उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अदालत ने मामले में 10 लोगों को दोषी ठहराया है और 16 सितंबर को उनकी सजा का निर्धारण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह भी याद रखना चाहिए कि NIA देश की प्रमुख जांच एजेंसियों में से एक है। जब झीरम मामले की जांच NIA को सौंपी गई थी, तब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार थी। ऐसे में अब जांच एजेंसी की कार्रवाई और न्यायिक फैसले पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि अगर उसके नेताओं के पास कोई तथ्य, प्रमाण या महत्वपूर्ण सबूत था तो उसे जांच एजेंसी के सामने क्यों नहीं रखा गया?
सबूत जेब में लेकर घूम रहे थे तो NIA को क्यों नहीं दिए..
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निशाना साधते हुए CM साय ने कहा कि विपक्ष में रहते हुए वे कहते थे कि झीरम मामले के सबूत उनकी जेब में हैं। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि अगर उनके पास वास्तव में कोई सबूत था, तो उन्होंने उसे NIA को क्यों नहीं सौंपा? जांच के दौरान एजेंसी के सामने तथ्य रखने के लिए पर्याप्त समय और अवसर था।

साय ने कहा कि आरोप लगाना आसान है, लेकिन किसी आरोप को साबित करने के लिए ठोस तथ्य और साक्ष्य जरूरी होते हैं। न्यायिक प्रक्रिया राजनीतिक बयानबाजी के आधार पर नहीं, बल्कि तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर आगे बढ़ती है।
कांग्रेस को अपने भीतर भी झांकना चाहिए..
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने भीतर भी झांकना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक तरफ कांग्रेस के नेता न्यायिक फैसलों पर सवाल खड़े कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संगठन के भीतर ही नेता एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोलते नजर आते हैं।

साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और भ्रम की राजनीति को समझती है। जनता को केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि तथ्य, प्रमाण और सच्चाई चाहिए। उन्होंने कहा कि झीरम जैसे गंभीर मामले में राजनीतिक बयानबाजी के बजाय न्यायिक प्रक्रिया और सामने आए तथ्यों को महत्व दिया जाना चाहिए।

