29 लोगों की जान लेने वाले हमले पर अदालत का फैसला, झीरम पीड़ित ने कहा- असली साजिशकर्ताओं तक नहीं पहुंची जांच।
बिलासपुर। बहुचर्चित 2013 झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में शनिवार को जगदलपुर स्थित NIA की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत के फैसले के बाद मामले में दोषसिद्धि जरूर हुई है, लेकिन झीरम हमले के पीड़ित और कांग्रेस नेता विवेक वाजपेयी ने इसे न्याय मानने से इनकार किया है। उनका कहना है कि इस फैसले के बावजूद झीरम के पीड़ितों को वह न्याय नहीं मिला, जिसका वे वर्षों से इंतजार कर रहे हैं।
विवेक वाजपेयी ने NIA की जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पूरी जांच ‘मैच फिक्सिंग’ जैसी रही। उनका कहना है कि जिन लोगों ने अपराध किया, उन्हीं से जुड़े लोगों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कराई गई और जांच में अपनी सुविधा के हिसाब से कुछ लोगों को आरोपी बनाया गया, जबकि कुछ लोगों को बचा लिया गया। उन्होंने दावा किया कि कई ऐसे लोग मामले में फंस गए, जो उनके मुताबिक मुख्य साजिशकर्ता नहीं थे, जबकि असली साजिश रचने वालों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
वाजपेयी ने कहा कि झीरम पीड़ितों की ओर से दी गई रिपोर्ट को NIA जांच में प्राथमिकता नहीं दी गई। उनका आरोप है कि NIA ने उन्हें झीरम का पीड़ित तक नहीं माना। इसी वजह से न उन्हें कोई नोटिस या समंस मिला और न ही उनका बयान दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि वे खुद और उनका ड्राइवर झीरम हमले के पीड़ित हैं और घटना से जुड़ी जानकारी पहले ही विशेष न्यायिक जांच आयोग के सामने दर्ज करा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि NIA की जांच से पहले विशेष न्यायिक जांच आयोग ने सार्वजनिक विज्ञापन जारी कर घटना के पीड़ितों को अपना बयान दर्ज कराने का अवसर दिया था। उस दौरान उन्होंने झीरम हमले से जुड़ी पूरी जानकारी सिलसिलेवार तरीके से आयोग के सामने रखी थी। इसके बावजूद उन्हें लगता है कि उनकी ओर से दी गई जानकारी को NIA की जांच में वह महत्व नहीं मिला, जिसकी जरूरत थी।
NIA की चार्जशीट पर सवाल उठाते हुए वाजपेयी ने कहा कि जांच में 10 नक्सलियों के नाम सामने आए, लेकिन उनके मुताबिक उन लोगों को छोड़ दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि हमले में शामिल होने की बात कहने वाले या आत्मसमर्पण करने वाले करीब 40 से 50 नक्सलियों के नाम चार्जशीट में क्यों नहीं हैं। उनका कहना है कि जांच अगर वास्तविक साजिश तक पहुंचती तो इन सवालों के जवाब भी सामने आते।

विवेक वाजपेयी ने NIA की पूरी जांच को ‘हास्यास्पद’ बताते हुए कहा कि उन्हें NIA से पहले ही न्याय की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले के बाद भी पीड़ितों की न्याय की लड़ाई खत्म नहीं हुई है। अपनी ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट को लेकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और अब उन्हें न्यायपालिका से न्याय मिलने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि 25 मई 2013 को बस्तर जिले के दरभा थाना क्षेत्र की झीरम घाटी में नक्सलियों ने कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ के काफिले पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत कांग्रेस नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों सहित कुल 29 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। झीरम घाटी का यह हमला छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास की सबसे भयावह घटनाओं में शामिल है। वर्षों बाद आए अदालत के फैसले से मामले में दोषसिद्धि हुई है, लेकिन पीड़ित पक्ष की ओर से उठाए गए सवालों ने एक बार फिर झीरम हमले की जांच और कथित बड़ी साजिश को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

