नेहरू चौक से गांधी चौक तक गूंजा एकता और सद्भाव का संदेश, सभी समाजों और वर्गों के लोगों ने लिया हिस्सा.. अफवाहों से दूर रहने और कानून हाथ में न लेने की अपील।
बिलासपुर। शहर में शांति, सामाजिक सद्भाव और भाईचारे का संदेश देने के लिए गुरुवार को बिलासपुर में शांति मार्च निकाला गया। कलेक्टर संजय अग्रवाल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के नेतृत्व में निकले इस मार्च में विभिन्न समाजों एवं समुदायों के प्रतिनिधियों, शांति समिति के सदस्यों, गणमान्य नागरिकों, मीडिया प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में शहरवासियों ने हिस्सा लिया।
शांति मार्च नेहरू चौक से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए गांधी चौक पहुंचा, जहां इसका समापन हुआ। मार्च में शामिल लोगों ने एकजुटता का संदेश देते हुए शहर की शांतिपूर्ण पहचान और आपसी भाईचारे को मजबूत बनाए रखने का संकल्प लिया।

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि बिलासपुर की पहचान हमेशा से शांति, सौहार्द और आपसी भाईचारे की रही है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी भी अफवाह या भ्रामक सूचना पर भरोसा न करें और बिना पुष्टि के उसे आगे प्रसारित भी न करें। उन्होंने कहा कि शहर में शांति और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि शहर में सामान्य और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने में नागरिकों, विभिन्न समाजों और मीडिया का महत्वपूर्ण सहयोग मिला है। उन्होंने कहा कि किसी भी विवाद या अफवाह की स्थिति में कानून अपने हाथ में लेने के बजाय तत्काल पुलिस या प्रशासन को सूचना दें। उन्होंने नागरिकों से आपसी सहयोग और जिम्मेदारी के साथ शांति बनाए रखने की अपील की।


विभिन्न समाजों और समुदायों के प्रतिनिधियों ने भी कहा कि बिलासपुर सभी वर्गों का शहर है और इसकी सबसे बड़ी ताकत सामाजिक एकता व भाईचारा है। उन्होंने शांति व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस और प्रशासन को हरसंभव सहयोग देने की बात कही।
दरअसल, हालिया घटनाक्रम के बाद आयोजित शांति समिति की बैठक में शहर में शांति और सामाजिक सद्भाव मजबूत करने के लिए 3 सितंबर को शांति मार्च निकालने का निर्णय लिया गया था। इसी निर्णय के तहत यह मार्च आयोजित किया गया। बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता ने शहर की एकजुटता और शांतिप्रिय परंपरा का संदेश दिया।
रैली में नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप अग्रवाल, विभिन्न समाजों एवं समुदायों के प्रमुख, शांति समिति के सदस्य, मीडिया प्रतिनिधि, प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।

