राखी पर सेमरताल की 100 बहनों को मिला ‘आत्मनिर्भरता का तोहफा’ मछली पालन से गांव में ही कमाई की नई राह..

‘बिहान’ मिशन से जुड़ी महिलाएं, महज 300 रुपए में मिला मछली बीज, परिवार की आय बढ़ाने की तैयारी।

बिलासपुर। रक्षाबंधन के मौके पर सेमरताल की 100 ग्रामीण महिलाओं के लिए यह राखी सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत लेकर आई है। मछली पालन को आजीविका का साधन बनाकर 100 महिलाएं और उनके परिवार अब गांव में ही अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के तहत शुरू हुई इस पहल से महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर मिला है।

जनपद पंचायत बिल्हा के सेमरताल में ज्ञान सुधा संकुल संगठन के आईएफसी एवं आजीविका सेवा केंद्र के माध्यम से 100 हितग्राहियों को मछली पालन से जोड़ने के लिए फिंगरलिंग मछली बीज उपलब्ध कराया गया। प्रत्येक हितग्राही को 1000 मछली बीज दिए गए। मत्स्य विभाग की ओर से कुल 150 पैकेट फिंगरलिंग मछली बीज उपलब्ध कराए गए, जिन्हें हितग्राहियों को 300 रुपए प्रति पैकेट की दर से दिया गया।

कम लागत में शुरू होगा अपना रोजगार..

मछली बीज मिलने से ग्रामीण परिवारों को कम लागत में मछली पालन शुरू करने का अवसर मिला है। इसके लिए महिलाओं को गांव से बाहर जाकर रोजगार तलाशने की जरूरत नहीं होगी। स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल कर वे अपने गांव में ही मछली पालन कर सकेंगी और आने वाले समय में इससे अतिरिक्त आय अर्जित करने की उम्मीद है।

यह पहल महिलाओं को केवल आर्थिक रूप से मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें अपने परिवार की आय में सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

महिलाओं के हाथ मजबूत होंगे तो परिवार की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी..

सेमरताल की महिलाओं की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिला भागीदारी की नई तस्वीर पेश कर रही है। सही अवसर और सहयोग मिलने पर महिलाएं अपनी मेहनत को आमदनी में बदल सकती हैं। मछली पालन के जरिए अब इन परिवारों को अपनी आर्थिक स्थिति बेहतर करने का एक अतिरिक्त साधन मिला है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं को स्वरोजगार और आजीविका के अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। सेमरताल की यह पहल उसी सोच को जमीन पर उतारने का उदाहरण है।

राखी पर बहनों के हाथ में सिर्फ राखी नहीं, रोजगार का अवसर भी..

रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते और संकल्प का पर्व है। इस बार सेमरताल की 100 ग्रामीण महिलाओं के लिए यह पर्व आत्मनिर्भर बनने की नई उम्मीद लेकर आया है। मछली पालन के जरिए उन्हें गांव में ही काम करने का अवसर मिला है। अब इन महिलाओं की मेहनत से न सिर्फ उनके परिवार की आय बढ़ने की उम्मीद है, बल्कि गांव की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना है।

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