छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण का महाअभियान.. 17 सितंबर से ‘जल जन सेवा संकल्प’, तालाब-नहर से लेकर बांधों तक चलेगा निरीक्षण..

एक महीने तक चलेगा अभियान, जल स्रोतों की देखरेख के साथ बारिश के पानी का संचयन और भूजल रिचार्ज पर जोर.. किसानों से लेकर आम लोगों तक की होगी भागीदारी।

17 अक्टूबर तक चलने वाले अभियान में जल संरचनाओं की कार्यशीलता जांची जाएगी.. नहरों के टेल-एंड तक पानी पहुंचाने और रबी फसल के लिए जल उपलब्धता पर भी होगा फोकस।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण और जल स्रोतों की बेहतर देखरेख के लिए ‘जल जन सेवा संकल्प’ अभियान शुरू किया जा रहा है। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस दौरान तालाब, चेकडैम, नहर, बांध और अन्य जल संरचनाओं की स्थिति देखी जाएगी। साथ ही पानी बचाने, जल स्रोतों के संरक्षण और लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो ने सभी जिलों के कलेक्टर और जिला नोडल अधिकारियों को अभियान को प्रभावी ढंग से चलाने के निर्देश दिए हैं। अभियान को जल शक्ति अभियान-कैच द रेन 2026-27, कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन के आधुनिकीकरण (M-CADWM), बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 और जल शक्ति अभियान-जन भागीदारी (JSJB) 3.0 के साथ जोड़कर चलाया जाएगा।

तालाब, चेकडैम और नहरों की होगी जांच..

अभियान के दौरान चयनित तालाब, स्टॉपडैम, चेकडैम, एनीकट, रिचार्ज संरचनाओं और नहरों का निरीक्षण किया जाएगा। जहां इस मौसम में सुधार का काम संभव होगा, वहां काम कराया जाएगा। बाकी जरूरी कार्यों को आगामी संधारण कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा।

किसानों और अभियंताओं की संयुक्त टीम नहरों का निरीक्षण करेगी। इस दौरान यह देखा जाएगा कि नहर के आखिरी छोर तक पानी पहुंच रहा है या नहीं। आगामी रबी फसल के लिए पानी की उपलब्धता और जल वितरण व्यवस्था को लेकर किसानों से भी चर्चा की जाएगी।

अभियान में बांध सुरक्षा की जांच भी की जाएगी। इसके अलावा गांव और स्थानीय स्तर पर जल चौपाल और जल संकल्प कार्यक्रम होंगे, जिनमें जल स्रोतों के उपयोग, रखरखाव और संरक्षण पर लोगों से चर्चा की जाएगी।

बारिश के पानी और पेयजल स्रोतों पर भी फोकस..

सरकारी और सार्वजनिक भवनों में वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज व्यवस्था की जांच की जाएगी। जरूरत के अनुसार भवन मालिकों को तकनीकी सलाह भी दी जाएगी।

नगरीय क्षेत्रों में लोगों को पेयजल स्रोतों की जानकारी देने, जलागार और जल शोधन संयंत्रों पर जरूरी जानकारी प्रदर्शित करने तथा विद्यार्थियों को जल स्रोतों का भ्रमण कराने जैसी गतिविधियां भी की जाएंगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप और नल-जल योजनाओं की स्थिति और पानी की गुणवत्ता की जांच होगी। ग्राम पंचायत जल एवं स्वच्छता समितियों की बैठक और ग्राम सभा के जरिए जल स्रोतों के संरक्षण का संकल्प भी लिया जाएगा।

जल आपूर्ति और जल संरचनाओं के संचालन में लंबे समय से काम कर रहे पंप संचालक, गेट संचालक और गेज रीडर जैसे कर्मचारियों का सार्वजनिक अभिनंदन भी किया जाएगा।

17 सितंबर को ‘आशीर्वाद का दीया’, 7 अक्टूबर को ‘सेवा ज्योति यात्रा’..

अभियान के दौरान 17 सितंबर की शाम ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया जा सकेगा। इसके तहत बांध, बैराज, एनीकट और नहर शीर्ष जैसे सुरक्षित स्थानों पर दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। नदी घाटों की सफाई से जुड़ी गतिविधियां भी होंगी।

वहीं 7 अक्टूबर को ‘सेवा ज्योति यात्रा’ के लिए जलाशय के किनारे या नहर शीर्ष पर एकत्रीकरण स्थल तय किए जाएंगे।

सुरक्षा को लेकर भी स्पष्ट निर्देश..

विभाग ने कहा है कि अभियान के दौरान सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। मानसून के अंतिम चरण और खरीफ सिंचाई के समय को देखते हुए केवल व्यवहारिक और सुरक्षित कार्यों को ही प्राथमिकता दी जाएगी।

प्रवाहमान नहरों, भरे हुए जलाशयों, बांध शीर्ष, स्लूस तथा विद्युत और यांत्रिक हिस्सों से जुड़े कार्यों में आम लोगों की भागीदारी नहीं कराई जाएगी। ऐसे काम विभागीय कर्मचारी ही करेंगे। लोगों की भागीदारी केवल सुरक्षित गतिविधियों में कराई जाएगी।

हर जिले में जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता जिला नोडल अधिकारी होंगे। वे कलेक्टर के साथ समन्वय कर अभियान चलाएंगे। स्थानीय जरूरत, उपलब्ध संसाधन और मौसम की स्थिति के अनुसार जिलों में कार्यक्रमों की संख्या, स्थान और स्वरूप में बदलाव किया जा सकेगा।

अभियान के तहत होने वाली गतिविधियों को दूसरे विभागों के कार्यक्रमों के साथ भी जोड़ा जा सकेगा। इन कार्यों को विभागीय संधारण प्रावधानों, उपलब्ध सामग्री, विभिन्न योजनाओं के आपसी समन्वय या स्वैच्छिक जनभागीदारी के जरिए पूरा किया जाएगा।

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