ट्रैप कैमरा से लेकर M-STrIPES पेट्रोलिंग और Anti-Snare Walk तक का कराया गया व्यावहारिक अभ्यास, बाघों की मौजूदगी वाले इलाकों में निगरानी होगी और मजबूत।
सूरजपुर। जंगलों में बाघों की मौजूदगी पर नजर रखने से लेकर उनके संरक्षण और अवैध शिकार की रोकथाम तक अब वन अमला और ज्यादा तकनीकी दक्षता के साथ काम करेगा। इसी उद्देश्य से सूरजपुर वनमंडल में 12 और 13 सितंबर 2026 को ‘टाइगर प्रोटेक्शन एवं मॉनिटरिंग’ विषय पर दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। प्रशिक्षण में अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों को बाघ संरक्षण, वैज्ञानिक निगरानी, साक्ष्य संकलन और मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति में प्रभावी कार्रवाई की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
छत्तीसगढ़ शासन, वन विभाग के निर्देशानुसार और मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं क्षेत्रीय निदेशक, गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व, सरगुजा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला का मकसद वन अमले को आधुनिक तकनीकों से लैस करने के साथ फील्ड में आने वाली चुनौतियों से निपटने की क्षमता बढ़ाना रहा।

पहले दिन कक्षा में समझे बाघों के मूवमेंट और कॉरिडोर..
कार्यशाला के पहले दिन सूरजपुर वनमंडल कार्यालय के सभागार में कक्षा आधारित प्रशिक्षण हुआ। इसमें सरगुजा वन वृत्त में बाघों की वर्तमान और ऐतिहासिक मौजूदगी, उनके मूवमेंट, सेंट्रल लैंडस्केप कॉरिडोर, लैंडस्केप कनेक्टिविटी और NTCA की टाइगर मैपिंग से जुड़े विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।

वन अधिकारियों और कर्मचारियों को बाघों की मृत्यु के संभावित कारणों की पहचान और रोकथाम के बारे में भी बताया गया। इनमें बीमारी, आपसी संघर्ष, प्राकृतिक वृद्धावस्था के साथ मानवजनित कारणों जैसे शिकार और विद्युत करंट से होने वाली घटनाएं शामिल हैं।
दूसरे दिन जंगल में उतरा अमला, कैमरे से लेकर पगमार्क तक का अभ्यास..
दूसरे दिन प्रशिक्षण पूरी तरह मैदानी रहा। कोरिया वनमंडल के कटकोना कोलियरी/टेमरी बीट क्षेत्र में अधिकारियों और कर्मचारियों को बाघ संरक्षण एवं निगरानी की तकनीकों का प्रत्यक्ष अभ्यास कराया गया।
फील्ड प्रशिक्षण में विशेष रूप से..
ट्रैप कैमरा इंस्टॉलेशन एवं मॉनिटरिंग और TOTR (Tiger Outside Tiger Reserve)
M-STrIPES Patrol App के जरिए पेट्रोलिंग और डेटा संकलन
Cattle Kill की पहचान और रिकॉर्डिंग
Pugmark एवं Dung Analysis
Anti-Snare Walk के जरिए अवैध फंदों और अन्य खतरों की पहचान
व्यवस्थित और नियमित फुट पेट्रोलिंग की तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण के प्रमुख सत्रों का संचालन गौरव निहलानी, सदस्य, छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड एवं उप निदेशक, एलिफेंट रिजर्व, सरगुजा ने किया। उन्होंने बाघों की आधुनिक मॉनिटरिंग तकनीकों, फील्ड प्रोटेक्शन और पेट्रोलिंग के दौरान अपनाई जाने वाली वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक प्रक्रियाओं की जानकारी दी।
ग्रामीणों और बच्चों को भी संरक्षण अभियान से जोड़ने पर जोर..
कार्यशाला में यह भी तय किया गया कि बाघ संरक्षण को केवल वन विभाग की जिम्मेदारी तक सीमित न रखते हुए जनभागीदारी से जोड़ा जाए। स्थानीय ग्रामीणों, चरवाहों और स्कूली बच्चों को वन्यजीव संरक्षण गतिविधियों से जोड़ने, स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित टाइगर ट्रैकर्स तैयार करने और ‘वाघ चौपाल’ जैसे जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए लोगों में बाघ संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

मैदानी कर्मचारियों की सुरक्षा को भी प्रशिक्षण में खास महत्व दिया गया। इसके लिए ट्रैप कैमरा, वॉकी-टॉकी, टॉर्च, ग्लव्स, वेटरनरी किट और टाइगर ट्रैकर्स के पहचान-पत्र जैसे जरूरी संसाधनों की उपलब्धता और उनके सही इस्तेमाल पर चर्चा हुई।
कार्यशाला में सूरजपुर, कोरिया एवं मनेन्द्रगढ़ वनमंडल, गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व तथा एलिफेंट रिजर्व/तमोर पिंगला वन्यजीव अभयारण्य के अधिकारी और मैदानी कर्मचारी शामिल हुए। इसमें SDO, वन परिक्षेत्राधिकारी, डिप्टी रेंजर, फॉरेस्टर, बीट गार्ड और टाइगर ट्रैकर सहित मैदानी अमले ने हिस्सा लिया।
इस प्रशिक्षण से वन क्षेत्रों में निगरानी और पेट्रोलिंग को ज्यादा वैज्ञानिक बनाने, बाघों की मौजूदगी से जुड़ी सूचनाएं तेजी से जुटाने, वन्यजीव अपराधों पर नजर रखने और बाघों के आवास को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। साथ ही सरगुजा क्षेत्र में बाघ संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को मजबूत करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

