छत्तीसगढ़-ओडिशा बॉर्डर पर तस्करों के खिलाफ बड़ा शिकंजा, 3 दिन में 79 किलो संदिग्ध नशा और 1.47 किलो पैंगोलिन स्केल जब्त..

तीन अलग-अलग ऑपरेशन में 8 आरोपी गिरफ्तार, बाइक-स्कूटी और 6 मोबाइल जब्त.. जंगल के रास्तों से चल रहे संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच तेज।

नारकोटिक्स के बाद पैंगोलिन तस्करी का खुलासा, दोनों मामलों के बीच संभावित कनेक्शन और ‘बार्टर ट्रेड’ की आशंका भी जांच के दायरे में।

रायपुर/गरियाबंद। छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा से लगे जंगलों में तस्करी के खिलाफ सुरक्षा और जांच एजेंसियों ने तीन दिन में लगातार तीन बड़ी कार्रवाई की है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR), DRI, मलकानगिरी वन प्रभाग और सुकमा वन प्रभाग की संयुक्त कार्रवाई में करीब 79 किलो संदिग्ध नारकोटिक पदार्थ और 1.47 किलो पैंगोलिन स्केल बरामद किए गए हैं। कार्रवाई के दौरान 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि तीन मोटरसाइकिल, एक स्कूटी और मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन मामलों के पीछे कोई बड़ा अंतरराज्यीय नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।

मामले की शुरुआत 10 सितंबर की सुबह उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की बोराई वन जांच चौकी से हुई। नियमित गश्त और निगरानी के दौरान वन अमले ने ओडिशा के नवरंगपुर की ओर से आती एक मोटरसाइकिल को रोका। बाइक पर दो लोग सवार थे और उनके पास एक बड़ा बैग था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बाइक सीतानदी रेंज के कोर क्षेत्र में अनधिकृत रूप से प्रवेश कर रही थी।

इसके बाद बिरनासिल्ली वन जांच चौकी पर बैरिकेडिंग कर जांच की गई। यहां एक बैग बरामद हुआ, जिसमें करीब 31 किलो संदिग्ध नारकोटिक पदार्थ/वन उपज और एक मोबाइल फोन मिला। हालांकि, दोनों संदिग्ध बाइक लेकर मौके से फरार हो गए। जब्त सामग्री को आगे की जांच और एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई के लिए धमतरी पुलिस को सौंप दिया गया।

डिजिटल सुराग से नवरंगपुर तक पहुंची टीम..

जब्त सामग्री और मोबाइल से मिले शुरुआती डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद संदिग्धों की गतिविधियों के बारे में सुराग मिले। इसके आधार पर 11 सितंबर को DRI और USTR की टीम ने ओडिशा के नवरंगपुर जिले के धांध्रा और मंत्री क्षेत्र में दबिश दी।

कार्रवाई के दौरान प्रह्लाद हरिजन और बिमल कुमार माझी को करीब 48 किलो संदिग्ध नारकोटिक पदार्थ और एक स्कूटी के साथ पकड़ा गया। ऑपरेशन में USTR की डॉग स्क्वाड और ड्रोन टीम की भी मदद ली गई। पूछताछ और मौके से मिले साक्ष्यों के आधार पर अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क से जुड़े कुछ अहम सुराग मिलने की बात सामने आई है।

नशे की जांच से खुला पैंगोलिन तस्करी का रास्ता..

नारकोटिक्स मामले की जांच के दौरान मिले इनपुट के आधार पर टीम ने मलकानगिरी वन प्रभाग और सुकमा वन प्रभाग के साथ मिलकर मलकानगिरी जिले के गोविंदपल्ली क्षेत्र में कार्रवाई की। यहां तीन लोगों को हिरासत में लिया गया। उनके पास से करीब 1.47 किलो पैंगोलिन स्केल, तीन मोटरसाइकिल और पांच मोबाइल फोन जब्त किए गए।

इसके बाद पूछताछ और आगे की तलाशी में पैंगोलिन तस्करी में कथित रूप से शामिल तीन अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया। मामले में वन्यजीव अपराध प्रकरण OR No. 72 of 2026-27 दर्ज किया गया है।

क्या नशे और वन्यजीव तस्करी के पीछे एक ही नेटवर्क..

लगातार तीन दिनों में सामने आए इन मामलों ने जांच एजेंसियों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है- क्या जंगल के रास्तों का इस्तेमाल केवल अलग-अलग तस्करी के लिए हो रहा था या इनके पीछे कोई साझा अंतरराज्यीय नेटवर्क सक्रिय है?

USTR के कोर क्षेत्र में संदिग्ध नारकोटिक्स की आवाजाही, नवरंगपुर में बड़ी मात्रा में संदिग्ध पदार्थ की जब्ती और इसके बाद मलकानगिरी में पैंगोलिन स्केल मिलने के बीच संभावित संबंधों की जांच की जा रही है। जांच में नारकोटिक्स और वन्यजीव तस्करी के बीच संभावित कनेक्शन या अवैध सामान के ‘बार्टर ट्रेड’ की संभावना को भी शामिल किया गया है। हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक किसी भी कनेक्शन की पुष्टि के लिए आगे की जांच और ठोस साक्ष्यों का सत्यापन जरूरी है।

जंगल के रास्तों पर एजेंसियों की नजर..

USTR ने साफ किया है कि टाइगर रिजर्व के वन्यजीव कॉरिडोर और जंगल के रास्तों का इस्तेमाल तस्करी के लिए नहीं होने दिया जाएगा। छत्तीसगढ़, ओडिशा और महाराष्ट्र से जुड़े इलाकों में सक्रिय संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क की पहचान के लिए संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय से कार्रवाई जारी रहेगी।

इस पूरे ऑपरेशन में खुफिया जानकारी साझा करने, वन जांच चौकियों की निगरानी, ड्रोन और डॉग स्क्वाड, डिजिटल साक्ष्यों और पूछताछ से मिले इनपुट अहम रहे। अब जांच एजेंसियां तस्करी के संभावित रास्तों, इससे जुड़े लोगों और नारकोटिक्स तथा वन्यजीव तस्करी के बीच किसी वास्तविक संबंध की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।

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