बिलासपुर। GRP की एंटी क्राइम यूनिट में पदस्थ रहे और गांजा तस्करी से जुड़े गंभीर आरोपों में कार्रवाई झेल चुके बर्खास्त आरक्षक संतोष राठौर की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। आय से अधिक संपत्ति के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने जांच पूरी करने के बाद विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है।

इसके पूर्व ACB ने 1 दिसंबर 2024 को संतोष राठौर के बिलासपुर स्थित घर समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान संपत्ति, बैंक खातों, लेनदेन और आय के स्रोतों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई। जांच में आय के बताए गए स्रोतों की तुलना में अधिक संपत्ति सामने आने के बाद कोर्ट से मुकदमा चलाने की मंजूरी ली गई और अब विशेष अदालत में चार्जशीट पेश कर दी गई है।
दरअसल, यह कार्रवाई उस पुराने मामले से भी जुड़ी है, जिसमें संतोष राठौर GRP की एंटी क्राइम यूनिट का हिस्सा था। इस टीम में उसके अलावा लक्ष्मण गाइन, सौरभ नागवंशी, मन्नू प्रजापति, इंद्रजीत बघेल और राजा दुबे शामिल थे। बाद में राजा दुबे और प्रधान आरक्षक इंद्रजीत बघेल का ट्रांसफर कर दिया गया।

इसी दौरान वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायत पहुंची थी की एंटी क्राइम यूनिट के कुछ आरक्षकों पर गांजा तस्करी से जुड़े मामलों में अनियमितता के आरोप हैं। आरोप था कि तस्करों से गांजा जब्त करने के बाद उसमें हेराफेरी कर पुलिस प्रकरणों में बरामद गांजे की मात्रा कम बताई जाती थी। मामले में पुलिस विभाग ने 19 नवंबर 2024 को संतोष राठौर को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। राठौर पर गांजा तस्करी से जुड़े मामलों में कार्रवाई नहीं करने के बदले कथित रूप से रकम लेने के आरोप भी लगे थे। वह फिलहाल NDPS से जुड़े एक मामले में जेल में बंद है।

इधर, गांजा तस्करी से जुड़े मामले में GRP के अन्य आरक्षकों की संपत्ति और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है। जांच के दौरान कुछ बैंक खातों में तीन करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की जानकारी सामने आई है, जो उनकी सालाना आय से कई गुना अधिक है।

चार्जशीट दाखिल होने के साथ ही संतोष राठौर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला अब अदालत पहुंच गया है। विशेष अदालत में होने वाली सुनवाई में ACB की जांच, संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज और वित्तीय लेनदेन के साक्ष्य अहम होंगे। अब अदालत में यह तय होगा कि राठौर की घोषित आय और उसकी संपत्ति के बीच कितना अंतर है।

