कविताओं में गूंजा नारी शक्ति का शौर्य, ‘अबला नहीं सबला हूं’ मंच पर 35 से अधिक महिलाओं का सम्मान..

बिलासपुर। वेंकटेश साहित्य मंच द्वारा ‘अबला नहीं सबला हूं’ काव्य गोष्ठी एवं सशक्त नारी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 50 से अधिक कवि-कवयित्रियों ने नारी के साहस, संघर्ष, स्वाभिमान और सशक्तीकरण पर आधारित रचनाओं का पाठ किया। वहीं, विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली 35 से अधिक महिलाओं को सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ महिला आयोग की सदस्य सरला कोसरिया और वरिष्ठ कवयित्री डॉ. वीणा सिंह रागी ने वीरता की प्रतीक रानी लक्ष्मीबाई का स्मृति चिह्न भेंट कर नारी शक्तियों का सम्मान किया।

काव्य गोष्ठी में मुकेश गुप्ता ने अपनी पंक्तियों ‘अबला नहीं, सबला हूं मैं… जीवन जीने की कला हूं मैं, और आ जाऊं गर अपने में तो जान लो, जलजला हूं मैं’ के माध्यम से नारी शक्ति का प्रभावशाली चित्रण किया। शुभा शुक्ला निशा, शिप्रा घोष, सुषमा बग्गा और डॉ. वीणा सिंह रागी सहित अन्य रचनाकारों ने भी अपनी कविताओं से नारी के आत्मविश्वास और अदम्य साहस को स्वर दिया।

इस अवसर पर भिलाई के लेखक पोषण कुमार की पुस्तक ‘बोलते शब्द’ का विमोचन भी किया गया। इस मौके पर ड्राइंग एवं सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाली नन्हीं बच्चियों को पुरस्कृत कर उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित किया गया।

इस खास अवसर पर सम्मानित होने वालों में वैदिक न्यूज चैनल की मैनेजिंग डायरेक्टर सैय्यद सलमा, समाजसेविका आशा शर्मा, अनामिका छत्री, डॉ. गोपा शर्मा, कविता चावला, मेघा चौहान, ललिता नाग, मनीषा सिंह, निवेदिता मिश्रा, नेहा त्रिवेदी, अनीता दुबे, डॉ. वीणा सिंह रागी, सरला कोसरिया, शिप्रा घोष और शुभा शुक्ला निशा सहित अन्य महिलाएं शामिल रहीं।

कार्यक्रम संयोजक मुकेश गुप्ता एवं संजय शर्मा ने आयोजन के माध्यम से नारी सम्मान और साहित्यिक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित किया। समारोह ने संदेश दिया कि नारी अबला नहीं, बल्कि अपने साहस, आत्मविश्वास और सामर्थ्य से समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाली शक्ति है।

Related Articles

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img

Latest Articles