बिलासपुर। केंद्रीय जेल बिलासपुर में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक नई पहल की गई है। जेल में निरुद्ध 30 बंदियों को 10 दिन तक मशरूम उत्पादन और उससे बनने वाले मूल्यवर्धित उत्पादों का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य बंदियों को ऐसा हुनर सिखाना है, जिसे वे जेल से बाहर आने के बाद रोजगार या स्वरोजगार के रूप में अपना सकें। एसबीआई आरसेटी बिलासपुर की ओर से आयोजित यह प्रशिक्षण महानिदेशक, जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं, रायपुर के निर्देश और जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी के मार्गदर्शन में हुआ।
प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर जागृति साहू ने बंदियों को मशरूम की पहचान से लेकर उसे उगाने और तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया समझाई। इसमें मशरूम उत्पादन के लिए जरूरी सामग्री, तापमान और नमी का सही स्तर बनाए रखना, साफ-सफाई, देखभाल, कटाई और भंडारण की जानकारी दी गई। इसके साथ ही मशरूम से अलग-अलग मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने का तरीका भी बताया गया। बंदियों को केवल जानकारी देने तक प्रशिक्षण सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्हें व्यावहारिक तरीके से भी मशरूम उत्पादन की प्रक्रिया कराई गई, जिसमें प्रशिक्षणार्थियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया।

प्रशिक्षण के अंतिम दिन बंदियों के सीखे हुए हुनर की परीक्षा भी हुई। छत्तीसगढ़ आरसेटी के राज्य नियंत्रक अरुण सोनी के निर्देशन में मूल्यांकनकर्ता चंदन साहू और रामकुमार बसु ने प्रशिक्षणार्थियों के ज्ञान और व्यावहारिक कौशल का मूल्यांकन किया। वहीं एसबीआई आरसेटी के निदेशक राजेंद्र साहू के मार्गदर्शन में फैकल्टी दीप्ति मंडल और जगदीश पटेल ने प्रशिक्षण की व्यवस्थाओं में सहयोग किया। इस दौरान सहायक जेल अधीक्षक विजयानंद सिंह सहित जेल के अधिकारी मौजूद रहे।

जेल प्रशासन के अनुसार, इस प्रशिक्षण के पीछे उद्देश्य बंदियों को सजा की अवधि पूरी करने के बाद सम्मानजनक आजीविका का रास्ता देना है। मशरूम उत्पादन के जरिए वे कम संसाधनों में स्वरोजगार शुरू कर सकते हैं। ऐसे कौशल प्रशिक्षण बंदियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और आत्मनिर्भर जीवन की ओर आगे बढ़ाने में मददगार साबित हो सकते हैं।

