बिलासपुर। एक ओर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन बारिश से पहले शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने और गंदे पानी की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नगर निगम क्षेत्र के हेमू नगर में लोग पिछले करीब 10 दिनों से दूषित पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। स्थिति यह है कि महापौर पूजा विधानी के वार्ड में ही कई घरों में नलों से काला, बदबूदार और झागयुक्त पानी पहुंच रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक हेमू नगर में दशकों पुरानी पेयजल पाइपलाइन बिछी हुई है। कई जगहों पर यह पाइपलाइन नालियों के भीतर से गुजरती है। समय के साथ पाइपलाइन जर्जर हो चुकी है और जगह-जगह लीकेज होने के कारण नालियों का गंदा पानी पेयजल में मिल रहा है।
नाला सफाई के बाद और बढ़ी परेशानी..
रहवासियों का आरोप है कि हाल ही में बारिश से पहले नालियों की सफाई के दौरान छोटे पोकलेन मशीनों का इस्तेमाल किया गया। सफाई के दौरान नालियों के भीतर मौजूद पुरानी पाइपलाइन कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई। इसके बाद से समस्या और गंभीर हो गई है। अब सुबह और शाम की जलापूर्ति के दौरान कई घरों में साफ पानी की जगह काला और दुर्गंधयुक्त पानी आ रहा है।
यह समस्या विशेष रूप से पार्षद बल्लभ राव के निवास क्षेत्र, सांई सामुदायिक भवन से कलचुरी स्कूल तक के इलाके और आसपास की बस्तियों में अधिक देखी जा रही है।


शिकायत के बाद भी नहीं मिला स्थायी समाधान..
रहवासियों ने इसकी शिकायत वार्ड पार्षद बल्लभ राव से की। पार्षद के अनुसार दो-तीन स्थानों पर पाइपलाइन लीकेज की मरम्मत कराई गई, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई। लगातार गंदे पानी की शिकायतें मिल रही हैं। मामले की जानकारी जोन कार्यालय को भी दी जा चुकी है, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों में अब तक राहत नहीं मिल पाई है।
पहले पानी नहीं आता था, अब गंदा पानी आ रहा..
हेमू नगर लंबे समय से पेयजल संकट का सामना करता रहा है। गर्मियों में कम दबाव के कारण कई घरों तक पानी नहीं पहुंच पाता था। अब जब पानी की सप्लाई हो रही है तो उसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अधिकांश घरों में टंकियां सीधे पाइपलाइन से जुड़ी हैं और मोटर के जरिए यही दूषित पानी टंकियों में भर रहा है। लोगों का कहना है कि कई परिवार अनजाने में इसी पानी का उपयोग पीने और खाना बनाने में कर रहे हैं, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। कुछ रहवासियों का आरोप है कि पहले पार्षद इस समस्या को स्वीकार कर रहे थे, लेकिन अब इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।


सरकारी निर्देशों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई..
हाल ही में अधिकारियों की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जहां भी गंदा पानी मिलने की शिकायत हो, वहां तत्काल जलापूर्ति रोककर पाइपलाइन की जांच और सुधार कार्य किया जाए। इसके लिए सातों दिन बिना अवकाश काम करने के निर्देश भी दिए गए थे।
इसके बावजूद महापौर के वार्ड में एक सप्ताह से अधिक समय से दूषित पानी की समस्या बनी हुई है, जिससे नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
निगम अधिकारियों ने भी मानी समस्या..
नगर निगम के कुछ अधिकारियों ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर स्वीकार किया कि हेमू नगर में कई स्थानों पर पेयजल पाइपलाइन नालियों के भीतर से गुजरती है। ऐसी स्थिति में पाइपलाइन में लीकेज होने पर नालियों का गंदा पानी सीधे पेयजल में मिल जाता है।
अधिकारियों का कहना है कि इस समस्या की जानकारी लंबे समय से उच्च अधिकारियों को दी जाती रही है, लेकिन पाइपलाइन बदलने या वैकल्पिक व्यवस्था के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं कराया गया।
20 साल पुरानी समस्या, अब तक नहीं निकला समाधान..
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है। पिछले करीब 20 वर्षों से हेमू नगर की पेयजल व्यवस्था सवालों के घेरे में रही है। इस दौरान क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले कई जनप्रतिनिधि महत्वपूर्ण पदों पर रहे, लेकिन मूलभूत सुविधा से जुड़ी इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
बढ़ सकता है बीमारियों का खतरा..
लोगों का कहना है कि जब घरों तक नाली का गंदा पानी पहुंच रहा है, तब प्रशासन और नगर निगम को तत्काल आपातकालीन कार्रवाई करनी चाहिए। यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो हैजा, टायफाइड, डायरिया समेत अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
रहवासियों ने मांग की है कि पूरे क्षेत्र की पाइपलाइन की तकनीकी जांच कराई जाए, दूषित जलापूर्ति तत्काल बंद की जाए और जहां पाइपलाइन नालियों के भीतर से गुजर रही है, उसे सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।
फिलहाल हेमू नगर के लोग ऐसे हालात का सामना कर रहे हैं, जहां नल खोलते ही पानी के साथ बीमारी का डर भी घरों तक पहुंच रहा है। अब सभी की नजर नगर निगम और जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

