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Saturday, June 27, 2026

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कृष्ण-सुदामा की मित्रता की कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु, मेण्ड्रा की भागवत कथा में उमड़ी आस्था..

बिलासपुर। सकरी क्षेत्र के ग्राम मेण्ड्रा में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ कथा के छठवें दिन श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। कथा वाचक पंडित नरेश कुमार तिवारी ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा की अमर मित्रता का मार्मिक वर्णन किया। उनकी भावपूर्ण कथा सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो गए।

पंडित तिवारी ने कहा कि सच्ची मित्रता कभी धन-दौलत, पद या प्रतिष्ठा नहीं देखती। मित्रता का सबसे बड़ा आधार प्रेम, विश्वास और अपनापन होता है। उन्होंने बताया कि जब निर्धन ब्राह्मण सुदामा अपने बाल सखा भगवान श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे तो महलों की भव्यता देखकर संकोच में पड़ गए। लेकिन जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण को अपने प्रिय मित्र के आने का समाचार मिला, वे नंगे पांव दौड़कर उनका स्वागत करने पहुंचे। दोनों मित्रों का यह भावुक मिलन सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

कथा में आगे बताया गया कि भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा का अत्यंत प्रेम और सम्मान के साथ सत्कार किया। विदाई के समय उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से कुछ नहीं दिया, लेकिन जब सुदामा अपने घर लौटे तो उनकी साधारण झोपड़ी भव्य महल में बदल चुकी थी और उनका पूरा परिवार सुख-समृद्धि से भर गया। यह प्रसंग निस्वार्थ प्रेम, सच्ची मित्रता और भगवान की कृपा का प्रतीक है।

कथा के दौरान पंडित नरेश कुमार तिवारी ने उद्धव ज्ञान, कलयुग का वर्णन और राजा परीक्षित के मोक्ष प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

निर्मलकर परिवार के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कथा का आयोजन प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से किया जा रहा है। छठवें दिन भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और सुदामा चरित्र को सुनने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

आयोजकों ने बताया कि सातवें दिन राजा परीक्षित मोक्ष प्रसंग का वर्णन किया जाएगा। वहीं 30 जून को गीता पाठ, हवन, तुलसी वर्षा, सहस्त्रधारा आरती और प्रसाद वितरण के साथ श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत समापन होगा।

इस अवसर पर मुख्य यजमान मुकेश-राधिका निर्मलकर सहित संतोषी, आरती, परदेशी, विंदाप्रसाद, सरोज, धर्मेंद्र, रुपेश, आशीष, अमित, मिथलेश, बहोरण, सखाराम, रंजू, राजकुमार, अशोक, शालिकराम, सुनील, विकास, विशाल, मनीराम तथा निर्मलकर परिवार के सदस्य और क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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