रायपुर। छत्तीसगढ़ वन विभाग की कार्यप्रणाली में बदलाव को लेकर फॉरेस्ट रेंजर्स एसोसिएशन ने दो अहम प्रस्ताव सामने रखे हैं। एसोसिएशन ने प्रदेश के हर वन परिक्षेत्र में होने वाले निर्माण कार्यों को टेंडर या निविदा प्रक्रिया के जरिए कराने और वनक्षेत्रपालों को अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के गोपनीय प्रतिवेदन पर मतांकन का अधिकार देने की मांग की है। संगठन ने दोनों मुद्दों को विभागीय व्यवस्था, पारदर्शिता और परिक्षेत्र स्तर पर प्रशासनिक नियंत्रण से जोड़ते हुए आवश्यक आदेश जारी करने का आग्रह किया है।
एसोसिएशन की ओर से यह मांग पत्र प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख, छत्तीसगढ़ को सौंपा गया है। संगठन की 20 सितंबर को हुई बैठक में दोनों प्रस्तावों पर सहमति बनी थी। इसके बाद 23 सितंबर को विभागीय प्रमुख को पत्र भेजकर मांगों पर निर्णय लेने का अनुरोध किया गया।

हर वन परिक्षेत्र में निर्माण कार्य के लिए टेंडर की मांग..
एसोसिएशन ने प्रदेश के सभी वन परिक्षेत्रों में होने वाले निर्माण कार्यों के लिए टेंडर अथवा निविदा प्रक्रिया अनिवार्य करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि निर्माण कार्यों के लिए पूरे प्रदेश में एक समान प्रक्रिया निर्धारित की जानी चाहिए और इसके लिए विभागीय स्तर पर स्पष्ट निर्देश जारी होने चाहिए।
इस व्यवस्था के जरिए निर्माण कार्यों को एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत कराने पर जोर दिया गया है। एसोसिएशन ने सभी वन परिक्षेत्रों में निर्माण से जुड़े कामों के लिए निविदा प्रक्रिया लागू करने की मांग रखी है।
रेंजरों को अधीनस्थ कर्मचारियों की गोपनीय रिपोर्ट पर मिले अधिकार..
दूसरा प्रस्ताव वनक्षेत्रपालों की प्रशासनिक भूमिका से जुड़ा है। एसोसिएशन ने मांग की है कि वनरक्षक, वनपाल और उपवनक्षेत्रपाल के गोपनीय प्रतिवेदन पर मतांकन करने का अधिकार संबंधित वनक्षेत्रपाल को दिया जाए।

एसोसिएशन का तर्क है कि इन कर्मचारियों का कामकाज परिक्षेत्र स्तर पर वनक्षेत्रपाल की निगरानी में रहता है। ऐसे में उनके कार्य और दायित्वों के आधार पर गोपनीय प्रतिवेदन पर मतांकन का अधिकार भी वनक्षेत्रपाल के स्तर पर होना चाहिए। संगठन के मुताबिक इससे परिक्षेत्र स्तर पर प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।
अब विभाग के फैसले पर नजर..
रेंजर्स एसोसिएशन ने दोनों प्रस्तावों पर विभागीय स्तर पर विचार कर आवश्यक आदेश जारी करने का अनुरोध किया है। एक प्रस्ताव निर्माण कार्यों में निविदा प्रक्रिया से जुड़ा है, जबकि दूसरा गोपनीय प्रतिवेदन और वनक्षेत्रपालों के प्रशासनिक अधिकार से संबंधित है।
इन दोनों मांगों पर अब वन विभाग का रुख महत्वपूर्ण होगा। विभाग की ओर से लिए जाने वाले निर्णय से यह तय होगा कि निर्माण कार्यों की प्रक्रिया और परिक्षेत्र स्तर पर गोपनीय प्रतिवेदन की व्यवस्था में कोई बदलाव होता है या नहीं।

