बिलासपुर। सड़क हादसे में मौत के मामले में मुआवजा आदेश को चुनौती देने में 389 दिन की देरी पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पंजाब रोडवेज की बस के मालिक पर 38 हजार रुपये का खर्च लगाया है। न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल की पीठ ने देरी माफ करते हुए अपील स्वीकार कर ली, लेकिन अंतरिम राहत के लिए 30 दिन के भीतर कुल मुआवजे की 50 प्रतिशत राशि जमा करने की शर्त रखी है।
दरअसल, मामला 14 अक्टूबर 2019 को हुए सड़क हादसे का है। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने 22 फरवरी 2025 को मृतक के परिजनों को 1 करोड़ 9 हजार 160 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस पर छह प्रतिशत सालाना ब्याज भी निर्धारित किया गया था।
मुआवजा आदेश के खिलाफ बस मालिक की ओर से 22 जून 2026 को हाई कोर्ट में अपील दायर की गई, जिसमें 389 दिन की देरी हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने आया कि आदेश के बावजूद दावेदारों को अब तक मुआवजे की राशि नहीं मिली थी।
हाई कोर्ट ने देरी माफ करते हुए बस मालिक को 30 दिन के भीतर 38 हजार रुपये चेक के माध्यम से किसी एक दावेदार को अधिकरण के समक्ष देने का निर्देश दिया। साथ ही, मुआवजे की वसूली पर रोक से जुड़ी राहत के लिए निर्धारित अवधि में कुल मुआवजे की आधी राशि जमा करना अनिवार्य किया।
दावेदार जमा राशि निकाल सकेंगे, लेकिन उन्हें लिखित आश्वासन देना होगा कि कोर्ट के भविष्य के आदेश पर रकम लौटाने की जरूरत पड़ने पर वे राशि वापस करेंगे। अगली सुनवाई में खर्च और आधी मुआवजा राशि जमा करने की रसीद भी पेश करनी होगी। मामले में बस चालक सहित अन्य पक्षकारों को दोबारा नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

